Discover What the World Thinks of U.S.

The Shadow of bin Laden on Pakistan

<--

पाकिस्तान पर लादेन का साया

On 5/15/2011 8:16:36 PM

लादेन की मौत को भले ही एक पखवाडा होने को आ गया है लेकिन अभी भी उसका साया पाकिस्तान को बेचैन किए हुए है। सारी दुनिया में विश्वसनीयता का संकट झेलने के साथ ही सरकार को अपने ही लोगों के सवालों के जवाब देने में लफ्ज गले में अटक रहे हैं। लाहौर हाईकोर्ट में लादेन मामले पर दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं,वहीं सेना प्रमुख को भी गंभीर सवालों से दो चार होना पड रहा है।

लाहौर। पाकिस्तान के नौ चरमपंथी और धार्मिक समूहों ने अमेरिका द्वारा ओसामा बिन लादेन की हत्या का विरोध करने के लिए एक गुट बनाया है। इस गुट में जमात-उद-दावा भी शामिल है। देफा-ए-पाकिस्तान (पाकिस्तान की रक्षा) नाम के इस समूह में जमात-ए-इस्लामी, जमीअत उलेमा-ए-इस्लाम के दो धडे, जमीअत उलेमा-ए-पाकिस्तान का एक धडा, मजलिस अहरार, मर्कजी जमीअत अहल-ए-हदीथ, तंजीम-ए-इस्लामी व अंतरराष्ट्रीय खत्म-ए-नबुआत शामिल हैं। इन लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पीएमएल-एन और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ को भी अमेरिका के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में भाग लेने का न्योता दिया है।

पाक सांसद ने आईएसआई को लिया आडे हाथ

इस्लामाबाद। पाकिस्तान संसद के संयुक्त सत्र में एक मजहबी दल के सांसद तथा खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख के बीच तगडी नोंकझोंक होने की खबर है। शुक्रवार को हुई संयुक्त बैठक में जमीयत उलेमा ए इस्लाम के प्रमुख फजलुर रहमान के छोटे भाई और सांसद अता उर्र रहमान ने आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा से सवाल किया कि तालिबान को किसने पैदा किया था और किसने उसे वित्त पोषित किया। शनिवार की मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। रहमान ने बिन लादेन की तरह ‘मुजाहिदीन’ के खिलाफ अभियान संचालित करने के सेना के फैसले पर भी सवाल उठाया और शीर्ष सेना अधिकारियों की संसद में मौजूदगी पर कहा कि उनका बिग बास अमेरिका उनसे नाराज है इसलिए वे संसद में आए हैं। पाशा ने इस पर सांसद से अपील की कि वह मुजाहिदीन के इतिहास पर चर्चा में शामिल न हों। उन्होंने यह भी कहा कि जेयूआई जैसे दलों को लीबिया और सऊदी अरब से धन मिल रहा है। रिपोर्टो में यह जानकारी दी गई है। आईएसआई प्रमुख के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि हम इस पर चर्चा करेंगे तो बात बहुत दूर तक जाएगी और हर किसी को पता चल जाएगा कि किसको सऊदी अरब और लीबिया से धन मिल रहा है। सूत्रों ने बताया कि पाशा की इस टिप्पणी पर सांसदों ने मेजें थपथपाई। इसके बाद रहमान सदन से वाकआउट कर गए लेकिन दस मिनट बाद वह लौट आए।

अमेरिकी राजदूत अवांछित घोषित हो

पाकिस्तान की एक अदालत में अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी विशेष बलों की कार्रवाई में मार गिराए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। याचिका में अदालत से सरकार को यह निर्देश देने की अपील की गई है कि यदि अमेरिका लादेन को मारने की कार्रवाई के लिए माफी नहीं मांगता है तो पाक सरकार अमेरिकी राजदूत को ‘अवांछित व्यक्ति’ घोषित करे और अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों को साजो सामान की आपूर्ति के लिए आवागमन सुविधाओं को बंद करे। वकील जावेद इकबाल जाफरी ने शनिवार को लाहौर उच्च न्यायालय में यह याचिका दाखिल की और कहा कि यदि अमेरिका की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो सरकार को यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीज) को भेज देना चाहिए। जाफरी ने कहा कि 1959 में की गई मैत्री संधि के तहत अमेरिका आईसीजे के फैसले को मानने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ , बेनजीर भुट्टो तथा पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की ‘रीढविहीन नीतियों’ ने अमेरिका को बिना किसी डर के लादेन को मारने के लिए ऐबटाबाद में अभियान चलाने को ‘प्रोत्साहित’ किया। जाफरी ने दावा किया कि इन सभी नेताओं में अमेरिका के खिलाफ खडा होने के साहस की कमी थी, क्योंकि ये सब निर्दोष पाकिस्तानियों को उसे सौंपने के लिए डालर बटोरते रहे हैं।

राष्ट्रपति के अधिकार कयानी को देने याचिका

पाकिस्तान की एक अदालत में याचिका दायर कर मांग की गई है कि सरकार को आदेश दिया जाए कि वह सेना के कमांडर-इन-चीफ की सारी ताकतें राष्ट्रपति से लेकर सेना प्रमुख अशफाक परवेज कायानी को सौंप दे, ताकि सेना स्वतंत्र होकर निर्णय ले सके। यह याचिका एबटाबाद में अमेरिकी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के मद्देनजर दायर की गई है। लाहौर उच्च न्यायालय में चौधरी मुहम्मद सिद्दीक नामक व्यक्ति की ओर से वकील राणा इलामुद्दीन गाजी ने शनिवार को याचिका दायर की। याचिका के अनुसार अगर सरकार ने अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ प्रतिक्रिया करने का आदेश दिया होता तो पाकिस्तानी सरजमीं पर इस तरह की कार्रवाई कर पाना अमेरिकियों के लिए नामुमकिन होता। इस याचिका में कहा गया है कि सेना को सरकार के नियंत्रण में नहीं होना चाहिए ताकि वह देश की सीमा के उल्लंघन के किसी भी मामले में स्वतंत्र निर्णय ले सके। बीते दो मई को एबटाबाद में अमेरिकी सुरक्षा बलों ने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इसके बाद से पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों की खासी आलोचना हो रही है। इस याचिका को सेना के समर्थन में चल रहे एक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।







Leave a comment